आज मैंने हिन्दी में लिखने का निर्णय लिया क्योंकि हिन्दी में भी मुझे पाण्डित्य अर्जित करना है। मेरे विद्यालय में हिन्दी भाषा आठवीं कक्षा तक अनिवार्य थी, इसलिए मुझे इसका अच्छा ज्ञान है। मेरे मित्र जब-जब मेरे साथ हिन्दी में बात करेंगे, तो यह मेरे लिए और भी अच्छा होगा।
अच्छा, वह सब ठीक है। आज का लेख क्या है? आज मैंने जिम में हिन्दी गाना सुनते हुए ‘दिल चाहता है’ फिल्म का एक गाना बहुत दिनों बाद सुना। यह गाना प्रेम के बारे में है। एक पंक्ति ने मुझे बहुत छू लिया: ‘देखो, नदी के किनारे पंछी पुकारे, किसी पंछी को
देखो, ये जो नदी है मिलने चली है सागर ही को
ये प्यार का ही सारा है कारवाँ।’
यह कोई नई बात नहीं है, पर जीवन की दौड़ में हम इसे भूल जाते हैं। इस गाने को सुनकर मेरे चेहरे पर अनायास ही मुस्कान आ गई। इस संतोषजनक अनुभव के साथ मैं अपनी लेखनी का समापन करती हूँ।
आगे मैं तमिल और कन्नड भाषाओं में भी लिखना चाहती हूँ।देखते हैं कि मैं लिख सकती हूँ या नहीं.
शुभरात्रिः आप सभी को।

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